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बक्सर जिला परिवहन कार्यालय में शराब बरामद, जांच शुरू

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बक्सर के जिला परिवहन कार्यालय में पुलिस और उत्पाद विभाग की छापेमारी के दौरान सैकड़ों खाली शराब की बोतलें और 7 भरी बोतलें बरामद हुईं। मामले की जांच जारी है।

बक्सर/आलम की खबर: शराबबंदी लागू होने के बावजूद बिहार में सरकारी दफ्तरों से शराब बरामद होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। राजधानी पटना के सचिवालय परिसर में शराब मिलने के बाद अब बक्सर के जिला परिवहन कार्यालय से शराब बरामद होने की खबर ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त छापेमारी में कार्यालय परिसर से सैकड़ों खाली शराब की बोतलें, टेट्रा पैक के खाली पाउच और सात भरी हुई शराब की बोतलें बरामद की गई हैं। इस घटना के बाद पूरे जिले में चर्चा का माहौल है और शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बक्सर के जिला परिवहन कार्यालय परिसर में शराब रखी गई है। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम हरकत में आ गई। अधिकारियों के नेतृत्व में टीम ने अचानक कार्यालय परिसर में छापेमारी शुरू की। कार्रवाई के दौरान भवन के एक-एक कमरे, अलमारी और आसपास के हिस्सों की गहन तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान अधिकारियों को भवन के निचले हिस्से में बने एक कमरे से भारी मात्रा में शराब से जुड़ी सामग्री मिली। पुलिस के अनुसार वहां सैकड़ों खाली शराब की बोतलें और टेट्रा पैक के खाली पाउच पड़े हुए थे। इसके अलावा 330 एमएल की सात भरी हुई शराब की बोतलें भी बरामद की गईं। बरामद बोतलें अलमारी और उसके आसपास छिपाकर रखी गई थीं। इस खुलासे के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भी हड़कंप मच गया।

सदर एसडीपीओ गौरव पांडेय ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर दोपहर करीब दो बजे यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि गार्ड रूम से सटे एक कमरे का उपयोग अस्थायी किचन की तरह किया जा रहा था। उसी कमरे से शराब की खाली और भरी बोतलें बरामद हुईं। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।

हालांकि अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कार्यालय परिसर तक कैसे पहुंची और इसका इस्तेमाल कौन कर रहा था। जांच एजेंसियां कार्यालय में तैनात कर्मचारियों, गार्डों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही हैं। साथ ही परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। सरकार लगातार दावा करती रही है कि राज्य में शराब के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। बावजूद इसके समय-समय पर सरकारी कार्यालयों, थानों और अन्य सरकारी परिसरों से शराब मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे विपक्षी दलों और आम लोगों के बीच शराबबंदी कानून को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कार्यालय से शराब बरामद होना बेहद गंभीर मामला है। इससे न केवल सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी पर भी बहस शुरू हो जाती है। लोगों का कहना है कि जब सरकारी परिसरों में ही शराब पहुंच रही है तो आम इलाकों में इसकी रोकथाम कितनी प्रभावी होगी, यह बड़ा सवाल है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि शराबबंदी कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन संस्थाओं पर है, यदि वहीं इस तरह की गतिविधियां सामने आएंगी तो कानून का संदेश कमजोर पड़ेगा। कई लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि शराबबंदी केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है। उनका आरोप है कि राज्य में अवैध शराब कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है और समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं इसकी पुष्टि करती हैं।

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। पुलिस और उत्पाद विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जानकारों का मानना है कि शराबबंदी कानून लागू होने के बाद बिहार में अवैध शराब नेटवर्क पर कई बार कार्रवाई हुई है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण अब भी चुनौती बना हुआ है। कई बार सरकारी और निजी परिसरों से शराब मिलने की घटनाएं कानून-व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाती हैं।

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब कहां से लाई गई थी और कितने समय से कार्यालय परिसर में रखी गई थी। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस पूरे मामले के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून की जमीनी स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले का खुलासा होगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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